आपको सादर समर्पित
जलकर खुद जग को रोशन करता ,
जलता हुआ एक दीप समझू आपको मै !
या पूजन के लिये समर्पित,
थाली पर रखी श्रद्धा का वह पुष्प आपको !
मै प्रतिरूप समझू जीवन्त मूल्यो का,
या फिर ईश्वर का ही एक रूप समझ लू आपको मै !
पास मेरे इन पन्क्तियो के,
शुभकामनाओ के लिये इस दीवाली पर क्या भला है?
मैने तो सदा एक वट व्रिक्ष समझा,
या फिर शुभेच्छाओ का ही एक जगमगाता दीप समझा आपको है!
शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2009
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